निर्यात भुगतान की समयसीमा नौ महीने, मुरादाबाद के हस्तशिल्प कारोबारियों को बदलनी होंगी रणनीतियां

एक अक्तूबर से लागू हुआ नया नियम, पहले 15 महीने तक मिलती थी मोहलत, रुपये में भुगतान वाले सौदों के लिए 12 महीने की समयसीमा

मुरादाबाद। जिले के निर्यातकों को अब विदेशी खरीदारों से भुगतान हासिल करने के लिए पहले के मुकाबले कम समय मिलेगा। क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने निर्यात से प्राप्त रकम को भारत वापस लाने की समयसीमा 15 महीने से घटाकर नौ महीने कर दी है। नया प्रावधान एक अक्तूबर 2026 से लागू हो गया है। इससे निर्यातकों को विदेशी खरीदारों के साथ भुगतान की शर्तों, कारोबार में लगने वाली पूंजी और रकम की वसूली की योजना पर विशेष ध्यान देना होगा।

आरबीआई की 22 सितंबर 2026 की अधिसूचना के अनुसार, सामान्य निर्यात के मामले में भुगतान प्राप्त करने और उसे भारत वापस लाने की समयसीमा पहले 15 महीने थी, जिसे घटाकर नौ महीने कर दिया गया है। वहीं, जिन निर्यात सौदों का बिल भारतीय रुपये में बनाया जाता है या जिनका भुगतान रुपये में निपटाया जाता है, उनके लिए यह अवधि 18 महीने से घटाकर 12 महीने कर दी गई है। निर्धारित समय में भुगतान प्राप्त करने में देरी होने पर निर्यातक कारण बताते हुए अपने अधिकृत बैंक से समयसीमा बढ़ाने का अनुरोध कर सकते हैं। बैंक मामले के आधार पर इस पर निर्णय ले सकता है।

यंग एंटरप्रेन्योर्स सोसायटी के अध्यक्ष जेपी सिंह ने बताया कि मुरादाबाद से पीतल के सजावटी सामान, धातु के बर्तन, घरेलू उपयोग की वस्तुएं और अन्य हस्तशिल्प उत्पाद विदेश भेजे जाते हैं। निर्यात की प्रक्रिया में उत्पादन, माल की आपूर्ति, शिपमेंट और विदेशी खरीदार से भुगतान प्राप्त करने तक कारोबारियों की पूंजी लगी रहती है। भुगतान मिलने की अवधि कम होने से निर्यातकों को खरीदारों के साथ भुगतान की शर्तें तय करते समय अधिक सतर्कता बरतनी होगी। समय पर रकम नहीं मिलने की स्थिति में कारोबार की अगली खेप तैयार करने और कच्चा माल खरीदने के लिए उपलब्ध पूंजी पर भी दबाव पड़ सकता है। एसएचईए के अध्यक्ष नवेद उर रहमान ने बताया कि नए नियम के मद्देनजर निर्यातकों के लिए विदेशी खरीदारों की भुगतान क्षमता, पुराने बकाया और भुगतान की निर्धारित तारीखों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।

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